Entkhab UP: इंतखाब और खतौनी की नकल के बारे में पूरी जानकारी

तहसील भूलेख खतौनी नकल : उत्तर प्रदेश के गांवों में जमीन से जुड़ा शायद ही कोई ऐसा काम हो, जिसमें इंतखाब की जरूरत न पड़ती हो। किसान हो या आम जमीन मालिक, बैंक से लोन लेना हो, सरकारी योजना में आवेदन करना हो या जमीन की रजिस्ट्री करानी हो-हर जगह सबसे पहले यही सवाल पूछा जाता है कि “इंतखाब लाए हैं?”

लेकिन व्यवहारिक सच्चाई यह है कि अधिकतर लोग इंतखाब का अर्थ, उसकी सीमा और उसकी कानूनी हैसियत को पूरी तरह नहीं समझते। इंतखाब को लेकर भ्रम ही कई बार बड़े विवाद, लोन रिजेक्शन और रजिस्ट्री रुकने का कारण बन जाता है।

यह फीचर आर्टिकल इंतखाब (tehsil bhulekh khatauni nakal) से जुड़े उन सभी जरूरी पहलुओं को स्पष्ट करता है, जिन्हें हर किसान और जमीन मालिक को जानना चाहिए।

इंतखाब क्या होता है? (tehsil bhulekh khatauni nakal)

राजस्व अभिलेखों की भाषा में इंतखाब Entkhab का अर्थ है- खतौनी में दर्ज विवरण की नकल (कॉपी)

खतौनी वह मूल राजस्व रिकॉर्ड है, जिसमें यह दर्ज रहता है कि किसी गांव में किस खाते की जमीन किस व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम दर्ज है। उसी खतौनी से जब किसी खाते की जानकारी निकालकर दी जाती है, तो उसे इंतखाब कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो-
इंतखाब जमीन के रिकॉर्ड की फोटो कॉपी नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड से निकाली गई लिखित जानकारी है।

क्या इंतखाब और खतौनी एक ही होते हैं?

गांवों में यह सबसे आम गलतफहमी है कि इंतखाब और खतौनी एक ही चीज हैं।
जबकि वास्तव में दोनों अलग-अलग हैं।

  • खतौनी मूल राजस्व अभिलेख है, जिसे तहसील स्तर पर सुरक्षित रखा जाता है।
  • इंतखाब उसी खतौनी से निकाली गई जानकारी की नकल है।

यानी खतौनी मूल है और इंतखाब उसकी प्रति। इसी कारण इंतखाब को अस्थायी प्रमाण माना जाता है, जबकि खतौनी मूल रिकॉर्ड होती है।

तहसील भूलेख खतौनी नकल (इंतखाब) में कौन-कौन सी जानकारी होती है?

एक सही इंतखाब में सामान्यतः निम्न जानकारी होती है:

  • गांव का नाम
  • तहसील और जिला
  • खाता संख्या
  • खातेदार (जमीन मालिक) का नाम
  • खसरा नंबर
  • प्रत्येक खसरे का रकबा
  • कुल रकबा

यह सारी जानकारी खतौनी में दर्ज स्थिति के अनुसार ही होती है।

इंतखाब (tehsil bhulekh khatauni nakal) किस काम आता है?

इंतखाब का उपयोग अनेक सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों में किया जाता है, जैसे—

  • किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कृषि ऋण
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
  • जमीन की रजिस्ट्री
  • कोर्ट में प्रारंभिक साक्ष्य के रूप में
  • विभिन्न सरकारी योजनाओं में आवेदन

हालांकि यह समझना जरूरी है कि इंतखाब मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं है, बल्कि उस समय के राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति बताने वाला दस्तावेज है।

ये भी पढ़ें-

इंतखाब (Entkhab UP) कहां से प्राप्त किया जा सकता है?

वर्तमान समय में दो तरीके हैं-

1. ऑनलाइन इंतखाब

राज्य सरकार के भूलेख पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने खाते की जानकारी ऑनलाइन देख सकता है। यह तरीका सूचना प्राप्त करने के लिए उपयोगी है।

2. तहसील से प्रमाणित इंतखाब

तहसील में आवेदन देकर लेखपाल या संबंधित राजस्व अधिकारी द्वारा दिया गया इंतखाब प्रमाणित होता है। इस पर हस्ताक्षर और मुहर होती है, जिसे बैंक और रजिस्ट्री कार्यालय अधिक मान्यता देते हैं।

व्यवहार में देखा गया है कि महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रमाणित इंतखाब (tehsil bhulekh khatauni nakal) ही स्वीकार किया जाता है।

तहसील भूलेख खतौनी नकल (इंतखाब) निकलवाने के लिए क्या जरूरी होता है?

आमतौर पर इंतखाब प्राप्त करने के लिए-

  • गांव का नाम
  • खाता संख्या या खसरा संख्या

इतनी जानकारी पर्याप्त होती है। तहसील से लेते समय कभी-कभी आवेदन पत्र और पहचान की मांग की जा सकती है, ताकि रिकॉर्ड का दुरुपयोग न हो।

इंतखाब में नाम या रकबा गलत हो तो क्या करें?

यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। कई किसान यह मान लेते हैं कि इंतखाब में गलती होने पर वही सुधार हो जाएगा, जबकि यह सोच गलत है।

इंतखाब में वही जानकारी आती है जो खतौनी में दर्ज होती है।
यदि खतौनी में-

  • नाम गलत है
  • पिता का नाम गलत है
  • रकबा कम या ज्यादा है

तो पहले खतौनी सुधार, नामांतरण या वरासत की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जब खतौनी सही होगी, तभी इंतखाब अपने आप सही हो जाएगा।

क्या इंतखाब पर लेखपाल या कानूनगो की मुहर जरूरी है?

ऑनलाइन निकाले गए इंतखाब पर आमतौर पर कोई हस्ताक्षर या मुहर नहीं होती। यह केवल जानकारी के लिए होता है।

जबकि तहसील से जारी इंतखाब पर-

  • लेखपाल
  • कानूनगो
  • या तहसील स्तर की मुहर

होती है, जिसे अधिकतर विभाग मान्यता देते हैं।

इंतखाब और नामांतरण (वरासत) का संबंध

यदि किसी खातेदार की मृत्यु हो चुकी है और नामांतरण नहीं हुआ है, तो इंतखाब में अभी भी मृत व्यक्ति का ही नाम दिखेगा।

इंतखाब स्वयं किसी का नाम नहीं बदलता। यह केवल खतौनी में दर्ज वर्तमान स्थिति को दर्शाता है। इसलिए पहले वरासत या नामांतरण कराना आवश्यक होता है।

इंतखाब कितने समय तक मान्य माना जाता है?

कानून में इसकी कोई निश्चित अवधि नहीं है, लेकिन व्यवहार में-

  • बैंक 3 से 6 महीने पुराना इंतखाब स्वीकार करते हैं
  • रजिस्ट्री के लिए हाल का इंतखाब मांगा जाता है
  • सरकारी योजनाओं में वर्तमान रिकॉर्ड आवश्यक होता है

इसलिए सलाह यही है कि कार्य से पहले नया इंतखाब प्राप्त किया जाए।

कभी-कभी इंतखाब में पूरी जानकारी क्यों नहीं दिखती?

इसके कई कारण हो सकते हैं-

  • जमीन चकबंदी प्रक्रिया में होना
  • रिकॉर्ड अपडेट न होना
  • खाता विभाजन लंबित होना
  • कोर्ट का स्थगन आदेश
  • तकनीकी त्रुटि

ऐसी स्थिति में लेखपाल या कानूनगो से संपर्क करना जरूरी होता है।

लेखपाल की व्यावहारिक सलाह

इंतखाब एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन इसे अंतिम सत्य न मानें। जमीन से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले-

  • खतौनी
  • नामांतरण की स्थिति
  • भू-नक्शा

तीनों की जांच अवश्य करें।

आपको बता दें, इंतखाब जमीन से जुड़े कार्यों की पहली सीढ़ी है, अंतिम फैसला नहीं। सही जानकारी के साथ इसका उपयोग किसान और आम जमीन मालिक को परेशानी से बचा सकता है, जबकि गलतफहमी वर्षों का विवाद खड़ा कर सकती है।

इस लेख का उद्देश्य यही है कि इंतखाब को लेकर भ्रम दूर हो और लोग राजस्व रिकॉर्ड को सही तरीके से समझ सकें।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है।  इसे किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या न्यायिक आदेश के रूप में न लिया जाए। अधिक जानकारी के लिए अपनी नजदीकी तहसील में संबंधित तहसीलदार/उपजिलाधिकारी (SDM) से संपर्क करें।